श्री शंकर गाथा (Shri Shankar Gatha) – पं. भगवंत वासुदेव अघोर | हिंदी अनुवाद : माऊली
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Description
‘श्री शंकर गाथा’ संतवर्य योगिराज सद्गुरु राजाधिराज श्री शंकर महाराज के जीवन, चरित्र और भक्तिपरंपरा से परिचित कराने वाला हिंदी ग्रंथ है। इस पुस्तक के मूल मराठी लेखक पं. भगवंत वासुदेव अघोर हैं और हिंदी अनुवाद माऊली ने किया है। श्री शंकर महाराज के भक्तों, साधकों तथा संतचरित्र और आध्यात्मिक साहित्य में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह ग्रंथ विशेष रूप से पठनीय है।
इस ग्रंथ में श्री शंकर महाराज के परम शिष्य सोनवणे मास्तरजी से संबंधित एक प्रसंग के माध्यम से चरित्रग्रंथ लिखने के पीछे की भावना और सद्गुरु की दृष्टि को प्रस्तुत किया गया है। ग्रंथ-वाचन केवल पढ़ने तक सीमित न रहे, बल्कि उसके विचारों का मनन और चिंतन करके जीवन में उसकी अनुभूति प्राप्त हो—इस भाव को पुस्तक में विशेष महत्त्व दिया गया है।
‘ग्रंथाचे करावे स्तवन। स्तवनांचे काय प्रयोजन। जेथे प्रत्ययासी कारण। प्रत्येयो पहावा।’ इस ओवी के माध्यम से ग्रंथ के स्तवन, उसके प्रयोजन और उसके अध्ययन से प्राप्त होने वाली अनुभूति की ओर संकेत किया गया है। इसी भाव के आधार पर पुस्तक में पारायण को केवल संख्या बढ़ाने का साधन न मानकर श्रद्धा, मनन, चिंतन और आत्मानुभूति से जोड़कर देखने का संदेश दिया गया है।
श्री शंकर महाराज के प्रति अनन्य श्रद्धा, सद्गुरु-भक्ति और साधना के भाव को केंद्र में रखते हुए यह हिंदी अनुवाद अधिकाधिक भक्तों और साधकों तक इस ग्रंथ की विषयवस्तु पहुँचाने का प्रयास है। हिंदी भाषा में उपलब्ध होने के कारण श्री शंकर महाराज के चरित्र और उनसे संबंधित आध्यात्मिक विचारों को हिंदी भाषी पाठकों के लिए समझना और पढ़ना सहज होता है।
श्री शंकर महाराज के भक्त, साधक तथा संतचरित्र, सद्गुरु-भक्ति और आध्यात्मिक साहित्य पढ़ने वाले पाठकों के लिए ‘श्री शंकर गाथा’ एक श्रद्धापूर्ण और चिंतनशील ग्रंथ है।






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